ग्राम पंचायत को पैसा कहां से मिलता है? आय के सभी स्रोत।

By Umesh Shriwas

August 15, 2026

ग्राम पंचायत को पैसा कहां से मिलता है? आय के सभी स्रोत

ग्राम पंचायत को पैसा कहां से मिलता है? केंद्र और राज्य सरकार के अनुदान, वित्त आयोग की राशि, पंचायत की अपनी आय, कर, शुल्क और योजनाओं से मिलने वाली राशि की पूरी जानकारी।

ग्राम पंचायत गांव के विकास और स्थानीय सुविधाओं के लिए कई तरह के कार्य करती है। सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता, स्ट्रीट लाइट, सामुदायिक भवन और दूसरी सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े कामों के लिए पंचायत को धन की आवश्यकता होती है।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ग्राम पंचायत को पैसा कहां से मिलता है? पंचायत की आय के स्रोत क्या हैं और पंचायत को मिलने वाली सरकारी राशि किस तरह आती है?

इस लेख में ग्राम पंचायत की आय और धन के प्रमुख स्रोतों को आसान भाषा में समझेंगे।

ग्राम पंचायत की आय के मुख्य स्रोत

ग्राम पंचायत की आय को सामान्य रूप से दो बड़े हिस्सों में समझा जा सकता है:

  1. सरकार से मिलने वाली राशि और अनुदान
  2. ग्राम पंचायत की अपनी आय (Own Source Revenue)

इसके अलावा अलग-अलग योजनाओं के तहत पंचायत से जुड़े कार्यों के लिए धन उपलब्ध कराया जा सकता है। किसी योजना की राशि का उपयोग उसी योजना के निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाता है।

पंचायती राज मंत्रालय ग्राम पंचायतों के वित्त से संबंधित विषयों में Finance Commission Grants और Own Source of Revenue (OSR) को अलग-अलग प्रमुख क्षेत्रों के रूप में सूचीबद्ध करता है।

1. केंद्र सरकार से मिलने वाला अनुदान

ग्राम पंचायतों को केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं और वित्तीय व्यवस्थाओं के माध्यम से राशि मिल सकती है।

केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली राशि का उपयोग संबंधित योजना या अनुदान के दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाता है।

इसका मतलब यह नहीं है कि पंचायत को मिलने वाली पूरी राशि पंचायत अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी काम में खर्च कर सकती है। कई निधियों के उपयोग के लिए निर्धारित नियम और उद्देश्य होते हैं।

2. वित्त आयोग की राशि

ग्राम पंचायतों के लिए वित्त आयोग के अनुदान का महत्वपूर्ण स्थान है।

वित्त आयोग केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों के वितरण से संबंधित सिफारिशें करता है तथा स्थानीय निकायों के संसाधनों को मजबूत करने के लिए भी सिफारिशें करता है।

15वें वित्त आयोग की स्थानीय निकायों के लिए अवधि 31 मार्च 2026 तक थी। इसके बाद 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए ग्रामीण स्थानीय निकायों से संबंधित अनुदान व्यवस्था लागू हो रही है। पंचायती राज मंत्रालय ने 16वें वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित ग्रामीण स्थानीय निकायों के अनुदान के लिए परिचालन दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं।

इसलिए किसी पुराने लेख में केवल “15वें वित्त आयोग की राशि” लिखकर छोड़ना सही नहीं होगा। वर्तमान वित्तीय अवधि देखते समय 16वें वित्त आयोग की व्यवस्था को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

3. राज्य सरकार से मिलने वाला अनुदान

ग्राम पंचायतों को राज्य सरकार से भी विभिन्न प्रकार की राशि और अनुदान प्राप्त हो सकते हैं।

राज्य के पंचायती राज कानून, बजट, योजनाओं और अन्य सरकारी प्रावधानों के अनुसार पंचायतों को राशि उपलब्ध कराई जा सकती है।

राज्य सरकार से मिलने वाली राशि का स्वरूप और उपयोग राज्य के नियमों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

4. पंचायत की अपनी आय

ग्राम पंचायत की अपनी आय को Own Source Revenue (OSR) कहा जाता है।

इसका अर्थ है कि पंचायत अपने अधिकार क्षेत्र में लागू कानूनों और नियमों के अनुसार कुछ कर, शुल्क, फीस या अन्य आय के स्रोतों से राजस्व प्राप्त कर सकती है।

पंचायती राज मंत्रालय ने राज्यों के लिए पंचायतों के Own Source Revenue से संबंधित कानूनों और नियमों की जानकारी उपलब्ध कराई है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि हर राज्य में पंचायत द्वारा लगाए जाने वाले कर और शुल्क एक जैसे नहीं होते। यह संबंधित राज्य के पंचायती राज कानून और नियमों पर निर्भर करता है।

5. पंचायत के कर और शुल्क

राज्य के नियमों के अनुसार ग्राम पंचायत को कुछ स्थानीय कर या शुल्क लगाने तथा वसूलने का अधिकार हो सकता है।

इनमें उदाहरण के तौर पर कुछ स्थानीय कर, शुल्क, बाजार या अन्य निर्धारित सेवाओं से संबंधित शुल्क शामिल हो सकते हैं।

उदाहरण के लिए छत्तीसगढ़ के लिए पंचायती राज मंत्रालय की OSR जानकारी में ग्राम पंचायत वैकल्पिक कर और शुल्क तथा ग्राम पंचायत टर्मिनल कर से संबंधित नियम सूचीबद्ध हैं।

इसलिए किसी पंचायत की वास्तविक आय जानने के लिए संबंधित राज्य के नियमों और पंचायत के वित्तीय रिकॉर्ड को देखना जरूरी है।

6. बाजार और अन्य स्थानीय शुल्क

कुछ ग्राम पंचायतों के अधिकार क्षेत्र में बाजार, मेला या अन्य स्थानीय गतिविधियों से संबंधित निर्धारित शुल्क या आय के स्रोत हो सकते हैं। लेकिन कौन-सा शुल्क लिया जा सकता है और उसकी दर क्या होगी, यह राज्य के कानून एवं स्थानीय नियमों पर निर्भर करता है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि देश की हर ग्राम पंचायत समान प्रकार का बाजार शुल्क वसूलती है।

7. पंचायत की संपत्ति से आय

ग्राम पंचायत के पास कुछ सार्वजनिक संपत्तियां या संसाधन हो सकते हैं, जिनसे नियमों के अनुसार आय प्राप्त हो सकती है।
उदाहरण के लिए कुछ मामलों में पंचायत की संपत्ति के किराये, पट्टे या लाइसेंस से संबंधित आय हो सकती है। ऐसी आय भी संबंधित राज्य के नियमों और पंचायत की संपत्ति से जुड़े प्रावधानों के अधीन होती है।

8. तालाब, मछली पालन और अन्य संसाधनों से आय

कुछ पंचायतों के पास तालाब या अन्य स्थानीय संसाधन हो सकते हैं, जिनका उपयोग नियमों के अनुसार किया जाता है।
जहां संबंधित कानून इसकी अनुमति देते हैं, वहां मछली पालन के अधिकार, पट्टे या अन्य उपयोग से पंचायत को आय प्राप्त हो सकती है। इस तरह की आय की व्यवस्था राज्य और स्थानीय नियमों पर निर्भर करती है।

9. दान और जन सहयोग

कुछ परिस्थितियों में पंचायत को दान या जन सहयोग के माध्यम से भी संसाधन मिल सकते हैं।

हालांकि किसी भी दान या योगदान को स्वीकार करने और उसके उपयोग के लिए लागू नियमों का पालन करना जरूरी है। जन सहयोग का उपयोग गांव के किसी सार्वजनिक उद्देश्य के लिए किया जा सकता है, लेकिन इसका रिकॉर्ड और लेखा-जोखा उचित तरीके से रखा जाना चाहिए।

10. मनरेगा और अन्य योजनाओं की राशि

मनरेगा जैसी योजनाओं के तहत गांव में रोजगार और परिसंपत्ति निर्माण से जुड़े कार्य किए जाते हैं।

यह राशि सामान्य पंचायत की “अपनी आय” नहीं मानी जानी चाहिए। यह संबंधित योजना के लिए उपलब्ध कराई गई राशि होती है और इसका उपयोग योजना के नियमों के अनुसार किया जाता है।

इसी तरह प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण या अन्य योजनाओं की राशि को भी उनके संबंधित उद्देश्य और दिशा-निर्देशों के अनुसार समझना चाहिए।

11. योजना की राशि और पंचायत की अपनी आय में अंतर

यह अंतर समझना बहुत जरूरी है।

मान लीजिए ग्राम पंचायत के खाते या पंचायत से संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड में किसी योजना के तहत राशि आई है। इसका मतलब यह नहीं कि वह राशि पंचायत की सामान्य आय है।

उदाहरण के लिए:

पंचायत की अपनी आय: कर, शुल्क, फीस या नियमों के अनुसार प्राप्त अन्य स्थानीय राजस्व
सरकारी अनुदान: केंद्र या राज्य सरकार से प्राप्त अनुदान
वित्त आयोग अनुदान: वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर स्थानीय निकायों के लिए उपलब्ध राशि
योजना की राशि: किसी विशेष सरकारी योजना के उद्देश्य से उपलब्ध धन

इन सभी की प्रकृति और उपयोग के नियम अलग हो सकते हैं।

ग्राम पंचायत को पैसा कौन देता है?

सरल भाषा में देखें तो पंचायत के संसाधन कई स्तरों से आ सकते हैं:

  • केंद्र सरकार
  • राज्य सरकार
  • वित्त आयोग से संबंधित अनुदान
  • ग्राम पंचायत की अपनी आय
  • कर और शुल्क
  • पंचायत की संपत्ति या संसाधनों से प्राप्त निर्धारित आय
  • दान या जन सहयोग
  • विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत उपलब्ध राशि
  • CSR (Corporate Social Responsiblity)

हालांकि प्रत्येक पंचायत को इन सभी स्रोतों से समान मात्रा में पैसा मिले, यह जरूरी नहीं है।

ग्राम पंचायत को कितना पैसा मिला, यह कैसे पता करें?

यदि आप अपने गांव की ग्राम पंचायत को मिली राशि जानना चाहते हैं तो केवल अनुमान लगाने के बजाय पंचायत के उपलब्ध वित्तीय रिकॉर्ड और संबंधित सरकारी पोर्टल की जानकारी देखना बेहतर है।

आप निम्न जानकारी प्राप्त कर सकते हैं:

  • पंचायत को कितनी राशि प्राप्त हुई?
  • राशि किस योजना या मद से मिली?
  • राशि किस वित्तीय वर्ष में मिली?
  • किस कार्य के लिए राशि स्वीकृत हुई?
  • कितना पैसा खर्च हुआ?
  • किस कार्य पर खर्च हुआ?
  • कितना पैसा शेष है?
  • भुगतान किसे किया गया?
  • कार्य की स्वीकृत लागत कितनी थी?

उपलब्ध जानकारी पंचायत के रिकॉर्ड, संबंधित सरकारी पोर्टल या लागू नियमों के अनुसार सूचना के अधिकार के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है।

पंचायत के पैसे का हिसाब कैसे देखें?

पंचायत की वित्तीय स्थिति समझने के लिए केवल बैंक खाते में आई राशि देखना पर्याप्त नहीं है।

किसी विकास कार्य के मामले में आप संबंधित रिकॉर्ड में उपलब्ध:

  • कार्य का प्रस्ताव
  • प्रशासकीय स्वीकृति
  • तकनीकी स्वीकृति
  • प्राक्कलन
  • कार्यादेश
  • माप पुस्तिका (MB)
  • बिल और वाउचर
  • भुगतान विवरण
  • कार्य पूर्णता संबंधी रिकॉर्ड

जैसी जानकारी देख सकते हैं।

इन दस्तावेजों से यह समझने में मदद मिल सकती है कि किसी कार्य के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई और वास्तविक रूप से कितना खर्च दर्ज किया गया।

क्या ग्रामीण पंचायत के पैसे की जानकारी मांग सकते हैं?

हां। पंचायत के कार्यों और सार्वजनिक धन के उपयोग से संबंधित जानकारी नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है।

यदि कोई जानकारी सार्वजनिक रिकॉर्ड में उपलब्ध है और उसे पाने के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम का उपयोग किया जा सकता है, तो संबंधित लोक सूचना अधिकारी से RTI के माध्यम से जानकारी मांगी जा सकती है।

उदाहरण के लिए आप पूछ सकते हैं:

“वित्तीय वर्ष 2025-26 में ग्राम पंचायत को विभिन्न मदों एवं योजनाओं के अंतर्गत प्राप्त राशि का मदवार विवरण उपलब्ध कराया जाए।”

इसके साथ खर्च और संबंधित कार्यों की जानकारी भी मांगी जा सकती है।

पंचायत की आय बढ़ाना क्यों जरूरी है?

ग्राम पंचायतों की अपनी आय मजबूत होने से स्थानीय स्तर पर वित्तीय क्षमता बढ़ सकती है।

इसी उद्देश्य से पंचायती राज मंत्रालय ने पंचायतों के Own Source Revenue (OSR) को मजबूत करने के लिए वित्तीय मॉडल और अन्य अध्ययन भी प्रकाशित किए हैं।

पंचायत की अपनी आय बढ़ने से स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग और स्थानीय जरूरतों के लिए वित्तीय क्षमता मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

निष्कर्ष

ग्राम पंचायत को पैसा केवल एक ही स्रोत से नहीं मिलता। पंचायत के संसाधनों में केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाले अनुदान, वित्त आयोग से संबंधित अनुदान, पंचायत की अपनी आय, कर एवं शुल्क, संपत्ति या संसाधनों से होने वाली निर्धारित आय और विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत उपलब्ध राशि शामिल हो सकती है।

लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हर राशि पंचायत की सामान्य आय नहीं होती और हर राशि को पंचायत अपनी इच्छा से खर्च नहीं कर सकती। राशि किस मद या योजना के तहत मिली है और उसके उपयोग के क्या नियम हैं, यह देखना जरूरी है।

यदि आप अपने गांव की पंचायत के बारे में जानना चाहते हैं कि “हमारी ग्राम पंचायत को इस साल कितना पैसा मिला और कहां खर्च हुआ?”, तो इसके लिए पंचायत के वित्तीय रिकॉर्ड और संबंधित सरकारी पोर्टल की जानकारी सबसे उपयोगी आधार हो सकती है। अन्य किसी विषय में लेख चाहिए तो आप हमें कमेन्ट में जरुर बताएं।

Umesh Shriwas

मैं एक आर.टी.आई. एक्टिविस्ट हूँ और Jaankaarilo.in वेब पोर्टल का संस्थापक हूँ। इस पोर्टल का उद्देश्य आम नागरिकों को उनके अधिकारों, सरकारी योजनाओं, कानूनों, सरकारी सेवाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़ी सरल, उपयोगी और विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध कराना है।

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